वात रोग क्या है और इसका उपचार कैसे करें -What is Arthritis in Hindi

दोस्तों हमारी उम्र बढ़ने के साथ साथ वात रोग नामक भयंकर बीमारी हर किसी को होती है।आयुर्वेद में कही गयी बातों के अनुशार इंसान के शरीर में होने वाले सभी प्रकार की बिमारियों का कारण (वात, पित और कफ) को माना गया है, और अगर देखा जाए तो वात रोग को सबसे ज्यादा कहा गया है। वात यानी हवा का स्थान जो हमारी छोटी आंत(Small intestine) के आगे वाले हिस्से में मौजूद पकाश्य में होता है। जब वाट युक्त खराब खाना या कुपित खाना खाते हैं तो ये हमारे पुरे शरीर में फ़ैल कर अनेक प्रकार की बिमारियों को जन्म देती हैं। बेहतर यही माना गया है के हमें इससे बचने के लिए वात रहित खाना खाना चाहिए।

vaat rog ka upchar

वात रोग के कारण हमारे शरीर के जोड़ों में दर्द, कमर में दर्द होने के साथ साथ पेशाब से सम्बंधित बहुत सारी कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। आज हम आपको इस आर्टिकल के द्वारा वात रोग से बचने के ऐसे घरुलू और कारगर तरीकों के बारे में बताने वाले हैं जिससे आप इससे बचाव के साथ साथ आपके शरीर में होने वाली बहुत सारी बिमारियों से लड़ने में मदद करेगा। इस आर्टिकल में बताई गयी साड़ी बातें हमारे द्वारा अध्ययन करने के बाद ही बताई गयी है।

 वात रोग को कई भागों में बांटा गया है :

  • उदान वात :- उदान वात हमारे गले में मौजूद रहती है इसका सबसे अच्छा उदहारण है डकार आना।
  • समान वाट :- समान वात हमरे शरीर के अमाशय और बड़ी आंत में पाई जाती है।
  • अपान वाट :- अपान वात हमारे शरीर में बड़ी आंत से शुरू होकर मलाशय तक होती है।
  • प्राण वात :- प्राण वात हमारे हार्ट के उपर वाले हिस्से में होती है।
  • व्यान वात :- व्यान वात की बात करें तो ये हमारे पुरे शरीर में मौजूद रहती है।

दोस्तों एक योग्य चिकित्सक ही वात रोग को पहचान और उसका इलाज कर सकता है और अगर वात रोग को सही से पहचाना नै जाये तो तो इसका इलाज संभव नहीं है। एलोपैथी यानी मेडिकल साइंस में इसका इलाज संभव नहीं है केवल आयुर्वेद में ही इसका इलाज होता है।

वात रोग के कारण :

  • दरअसल वात रोग का मुख्य कारण हमारे पाकाशय, अमाशय और मलाशय में हवा भर जाना होता है। आयुर्वेद में हवा का भर जाना ही वात रोग का मुख्य कारण माना गया है।
  • हमारे शरीर के अन्दर खाना न पचना भी वात रोग का एक मुख्य कारण है।

indigestion due to vaat

  • जब हमारे शरीर में अपच यानी खाना नहीं पचता तो  हमें अजीर्ण रोग होता है जो कब्ज को जन्म देता है और इसके कारन हमे गैस हो जाती है जो वात उत्पन्न करती है।
  • जब हमारे पेट के अंदर गैस बनती है तो ये भी वात रोग को उत्पन्न करती है।
  • जिन लोगों को कब्ज की समस्या ज्यादा होती है उन लोगों को वात लोग होने की संभावना कई गुना तक बढ़ जाती है।
  • सही समय पर खान पान ना होने के कारन भी वात रोग की उत्पत्ति होने की एक मुख्य वजह है।
  • सुबह सही समय न उठाना भी वात रोग का मुख्य कारण माना गया है।
  • सही समय पर मल मूत्र न करना वात रोग को बढ़ावा देता है।
  • खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना वात रोग का एक कारण है।
  • बासी और तैलीय खाना खाने के कारण भी वात रोग होता है।
  • शराब और मांस खाने के कारण भी आपको वात रोग हो सकता है।
  • ज्यादा देर तक एक ही जगह पर बैठे से वात रोग की समस्या होती है तो बेहतर यही होगा के ज्यादा देर तक एक ही जगह पर न बैठे या थोडा बहुत बीच में टहल ले।
  • कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बहुत ज्यादा खाना खाने की आदत होती है जिसके कारण उनका मोटापा बढ़ जाता है और कोई भी शारीरिक परिश्रम नहीं करते तो ऐसे में उनका वात रोग होने के चांस ज्यादा हो जाते हैं।
  • खाना खाते ही तुरंत बिस्तर पर नहीं जाना चाहिए कम से कम 15 मिनट तक टहल कर फिर बिस्तर पर लेटना चाहिए।

vaat rog ke karan motapa

वात रोग के लक्षण :

  • वात रोग के रोगी को अपने शरीर में एक अलग तरह की जकड़न महसूस होनी शुरू हो जाती हैं।
  • वात रोगी को अपना सिर भारी भारी और हल्का हल्का सर दर्द होने लग जाता है।
  • वात रोगी का गला हमेशा सुखा सुखा रहने लग जाता है और बार बार प्यास भी लगती है।
  • वात रोगी का पेट फूल जाता है और उसे कुछ खाने का मन भी नहीं करता।
  • रोगी के शरीर में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • जब वात रोग होता है तो उसे अपने जोड़ों में दर्द महसूस होने लग जाता है।
  • वात रोगी को डकारें और हिचकियाँ ज्यादा आने लग जाती हैं।
  • रोगी को गर्दन में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • रोगी की त्वचा रुखी और खुश्क हो जाती है।
  • वात रोगी की त्वचा भी मैली मैली सी हो जाती है यानी उसमे चमक नहीं रहती।
  • एक और मुख्य लक्षण ये है के उसे अपनी छाती के बीच में दर्द होने लग जाता है।
  • वात रोग के मरीजों के पैरों में गांठें बन्ने लग जाती है और उनका चलना फिरना मुस्किल हो जाता है।अगर किसी के पैरों में गाँठ बन रही है तो फ़ौरन उसे डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

vaat rog ke karan sujan

वात रोग के घरेलु और आयुर्वेदिक उपचार :

  • वात रोग ग्रशित व्यक्ति को अपने उपचार के लिए अपने भोजन में प्रतिदिन गेहूं की रोटी, अंकुरित मूंग की दाल के साथ साथ खाने में सलाद का भी उपियोग करना चाहिए।
  • वात रोग को जल्दी से जल्दी ठीक करने के लिए हर रोज कम से कम आधा चम्मच मेथी दाना के साथ थोड़ी सी अजवाइन का सेवन शुरू कर देना चाहिए।
  • वात रोगी को दिन हर रोज सुबह उठकर टहलना चाहिए जिससे उसे ताज़ी ऑक्सीजन मिल सके और उसका रोग जल्द से जल्द ठीक हो जाये।

mornig walk vaat rog

  • वात पीड़ित को अपने इलाज के लिए लगातार कम से कम ताजे फलों का जूस पीना चाहिए (मौसमी, अनार, संतरा)। इसके साथ ही अगर रोगी दिन में कम से कम 4 बार सेहद का सेवन करे तो इससे अच्छी बात ही क्या होगी। इसके अलावा रोगी को कुछ समय के लिए फलों का ही सेवन करना चाहिए।
  • रोगी को अपने शरीर रोजाना तिलों के तेल की मालिश करनी चाहिए जिससे के वात रोग आपकी त्वचा को नुकशान नै पहुँचा सके।
  • वात रोग से पीड़ित व्यक्ति को हर रोज खुली धुप में बैठकर सरसों के तेल से अपने पुरे शरीर पर मालिश करनी चाहिए।वात रोगी के लिए धुप बेहद ही लाभकारी साबित होती है।
  • वात रोगी के लिए सबसे जरुरी है उसे अपनी दिनचर्या को सही करना अगर वो रत को बहुत लेट सो और सुभ भी लेट उठ रहा है तो उसे निश्चित ही अपनी दिनचर्या में बदलाव करना होगा अगर उसे वात रोग से निजात पानी है तो।
  • अपने खाने में जितना हो सके उतना तैलीय खान पान बंद कर दें क्योंकि खाना जितना तैलीय होगा उतना लेट पचेगा और नतीजा आपको अपच होगी।
  • वात रोग के लिए आधा चम्मच सोंठ चूर्ण, आधा चम्मच जिवित्री के एलोवेरा के गुद्दे के साथ खाने से केवल 2 महीने में वात रोग ठीक किया जा सकता है।
  • 2 चम्मच मेथीदाना के साथ 4 चम्मच एलोवेरा का रस मिलकर हर रोज सुबह उठकर पीने से भी वात रोग ठीक हो जाता है। ।
  • एलोवेरा के गुदे को गेहूं की रोटी में मिलकर हर रोज सुबह बासी रोटी वो भी बिना घी से चुपड़ी खाने से वात रोग में बेहद आराम मिलता है और जल्द ही जड़ से भी खतम हो जाता है।

aloe-vera for vaat rog

  • वात रोग को जड़ से खत्म करने के लिए 200 ग्राम मेथीदाना चूर्ण, 100 ग्राम सोंठ, 200 ग्राम देसी घी, पीपल के पत्ते, काली मिर्च, धनिया, पीपरामूल, दालचीनी, और नागरमोथा लेकर सबका चूर्ण बना लें। इसके बाद 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। ये लड्डू हर रोज 1 खा लें। ये एक लड्डू हर रोज खाने से शरीर में सूजन, वात, और गैस की समस्या एक दम खत्म हो जाती है।
  • 10 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वात रोग तथा विकार शांत हो जाते हैं।
  • 20 ग्राम चोपचीनी, 4 ग्राम पीपरामूल और 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिलाकर सुबह शाम खाने से वात रोग की निजात मिलती है

वात रोग के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द और गठिया बा का इलाज :

gathiya baa vaat rog

  • एलोवेरा का गुद्दा निकालकर और उसको गर्म करने जोड़ों पर अच्छे से हर रोज सुबह शाम मालिश करने से जोड़ों का दर्द और गठिया बा ठीक हो जाता है।
  • अजमोदादी के चूर्ण लेकर उसमें 4 चम्मच एलोवेरा का जूस मिलकर खाने से गठिया रोग जड़ से खत्म हो जाता है।
  • 20 ग्राम आवला लेकर उसे 1 गिलाश पानी में उबालने के बाद इसमें 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिला लें और इसे दिन में 2 से 3 बार खाएँ, ये खाने से जोड़ों में होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।
  • चौलाई के पत्तों का 2 चम्मच रस निकाल लें, और उसे 20 ग्राम एलोवेरा के गूदे और 1 चम्मच अदरक के रस के साथ मिलकर गर्म करके हर रोज पी लें इससे जोड़ों में मजबूती आती है और वात रोग से होने वाला दर्द भी ठीक हो जाता है।
  • पीपल के पोधे की छाल निकालकर इसका गाढ़ा बनाकर इसमें एलोवेरा का गूदा मिलाकर पीने से जोड़ों में होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
  • करेले के जूस 2 चम्मच को एलोवेरा का रस के साथ मिलाकर आधा कप 10 दिनों तक सुबह शाम खाना खाने से पहले पीने से वात रोग के कारण होने वाला जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है।

लकवा या पक्षाघात होने पर घरेलू नुस्खे:  

lakva vaat rog

  • एलोवेरा के पत्तों को पानी में उबालकर इसकी भाप हर रोज लेने से लकवाग्रस्त व्यक्ति के शरीर में होने वाली अकडन 2 से 3 सप्ताह में ठीक हो जाती है।
  • एलोवेरा और तिल का तेल दोनों 50 ग्राम और 100 ग्राम की मात्रा में मिलाकर उबालें और इससे प्राप्त होने वाले तेल की रोजाना मालिश करने से वात रोग के कारण होने वाले लकवे में आराम होता है।
  • एलोवेरा के गूदे के साथ लहसुन की कलियों के साथ हर रोज मिलाकर खाने से लकवे का रोगी केवल 2 महीने में ठीक हो जाता है।
  • हर रोज सुबह शहद के साथ एलोवेरा के साथ मिलकर खाने से लकवा थोड़े दिन बाद ठीक हो जाता है।
  • 4 बादाम लेकर उसे 4 चम्मच एलोवेरा के जूस के साथ पीस लें और फिर गर्म करके खाने से लकवा वाले अंगों में शक्ति उत्पन्न हो जाती है जिससे वो थोड़े समय में चलने फिरने लग जाता है।
  • 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लेकर उसे एलोवेरा के रस के साथ मिलाकर रात को सोने से पहले खा ले। इससे लकवा जल्दी ही ठीक हो जाता है।

वात रोग के कारण होने वाली सूजन का घरेलू इलाज: 

  • वात रोग से जब हमारे शरीर में सुजन आ जाती है तो उस पर मुलतानी मिटटी में थोडा एलोवेरा का गूदा मिलाकर उसका सुजन वाली जगह पर लेप लगा लें थोड़े समय में सूजन गायब हो जाएगी।
  • सूजन आने पर 2 चम्मच एलोवेरा का रस, 1 चम्मच हल्दी और चूना आधा चम्मच इन सबको मिलकर इसका लेप लगाने से सूजन में लाभ मिलता है।
  • 1 चम्मच फिटकरी में एलोवेरा का रस 10 ग्राम को साथ में मिलाकर हल्का गर्म करके इसका लेप करें तो सूजन वाले अंग की सूजन खत्म हो जाती है।
  • रात को सोने से पहले एलोवेरा के गूदे से तलवों पर मालिश करने से शरीर की वात संतुलित रहती है और पैरों का सुनपन भी ठीक हो जाता है।

तो दोस्तों ये थे वात रोग होने के कारण, उसके लक्षण और उसे ठीक करने के घरेलू उपाय। आप में से बहुत सारे ऐसे अब भी होंगे जिन्हें ये नहीं पता होगा के वाट रोग आखिर है क्या और इसके इलाज क्या है? तो दोस्तों अपने साथियों को इसकी जानकारी देने के लिए इसे शेयर करें।

Amit Shrivastava
 

हैल्लो, मेरा नाम अमित अम्बरीष श्रीवास्तव है। मैं एक लेखक और एक ब्लॉगर हॅू और मुझे रचनात्मक लेखक बहुत पसंद है। मैंने 2013 में अपनी ब्लॉगिंग करियर की शुरूआत की थी, और कभी पीछे नहीं देखा। य​ह ब्लाग मैने स्वास्थ्य और तंदुस्र्स्ती से सम्बन्धित अपने विचार साझा करने के लिये बनाया है और मुझे आशा है कि आपको इसका कॉंटेंट पसंद आयेगा।

Click Here to Leave a Comment Below 0 comments

Leave a Reply:

CommentLuv badge