घर पर च्यवनप्राश कैसे बनायें -How To Make Chyawanprash At Home In Hindi

आपको बता दें की च्यवनप्राश आयुर्वेद की एक बहुत ही अदभुत औषधि है और च्यवनप्राश एक सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पादों में से एक है।

च्यवनप्राश खाने से आपके शरीर को बहुत सरे लाभ मिलते है और और च्यवनप्राश आपके लिए एक बहुत ही फायदेमंद टॉनिक है।

आपको बता दें की प्राचीन काल में जब  च्यवन ऋषि वृद्धावस्था के कारण बहुत ही ज्यादा कमज़ोर हो गए थे तब आयुर्वेद के सुप्रसिद्ध जाने माने वैद्य श्री अश्वनी कुमार जी ने उनके लिए आयुर्वेद जैसी एक ऐसी अदभुत और चमत्कार औषधि का अविष्कार किया था।

जिसके सेवन करने के बाद वृद्ध च्यवन ऋषि पुन: युवावस्था को प्राप्त हो गए थे और तभी से च्वयन ऋषि के नाम पर इस अमृत जैसी औषधि का नाम च्यवनप्राश पद गया था।

Chyawanprash recipe in hindi

आपको बात दें की च्यवनप्राश को ज़्यादातर सर्दियों में खाया जाता है क्यूंकि हमारे बुजुर्गो का मानना है की अगर हम च्यवनप्राश को सर्दियों में खाते है तो ये हमारे शरीर को बहुत ज्यादा फायदा देता है।

क्या आपको पता है की सर्दियों के मौसम में रोगप्रतिरोधक क्षमता युक्त च्यवनप्राश का सेवन तो सभी लोग करते है लेकिन क्या आप जानते है की इन विभिन्न ( तरह-तरह ) की औषधियों से बनने वाले च्यवनप्राश के बहुत सरे ब्रांड्स आजकल बाज़ार में उपबल्ध है पर आप इसको अपने हाथो से अपने घर में भी आसानी से तैयार कर सकते है।

आपको बता दें की आपकी सेहत के लिए चमत्कारिक गुणों से भरपूर च्यवनप्राश बच्चो, बुजुर्गो और जवानों के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है।

आप भी च्यवनप्राश को नीचे दी गई विधि के अनुसार उसको बनाकर एक डब्बे में भरकर रख लें और उसको सर्दियों में उसको दूध के साथ आपके परिवार के सभी सदस्यों को दे दें और इससे उनके शरीर में चुस्ती और फुर्ती बनती रहेगी।

च्यवनप्राश कैसे बनायें -How To Make Chyawanprash In Hindi

आज के इस Article में हम आपको च्यवनप्राश बनाना और उसके फायदों के बारे में बतायेंगे, तो चलिये शुरू करते हैं।

च्यवनप्राश को बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (Essential Materials)

आपको बता दें की च्यवनप्राश में आंवला सहित कुल 40 हज़ार से भी ज्यादा सामग्री का प्रयोग किया जीता है च्यवनप्राश को बनाने के लिए।

च्यवनप्राश को बनाने के लिए जो भी सामग्री चाहिए होती है वो आमतौर पर पंसारी के पास बड़ी ही आसानी से मिल जाती है।

अगर आपको च्यवनप्राश को उबलते समय मिलने वाली जड़ी-बूटियों में अगर किसी कारण वश कुछ जड़ी-बूटियां नही मिलती है तो आप आपके पास जो है उसी से च्यवनप्राश को बना सकते है।

आपको बता दें की च्यवनप्राश को बनाने में उपयोग होने वाली सामग्रियों में से एक केसर सबसे महंगी सामग्री होती है वर्ना बाकि सामग्री तो बड़ी ही आसानी से आपको मिल जाएँगी और ज्यादा महंगी भी नही मिलेगी।

च्यवनप्राश मे मुख्य तौर से पांच तरह की सामग्री प्रयोग होती है :

आंवला 5 किलो, वसाका, बेल, कचूर, लौंग, अंजीर, सफ़ेद चन्दन, अकरकरा, बिल्व, कमल केशर, दशमूल, पुनर्नवा, गिलोय, संठ, शतावरी, बिदरीकन्द, ब्राह्मी, छोटी हर्र (हरीतकी), जटामानसी, गोखरू, जीवन्ती, तुलसी के पत्ते, काकडसिंघी, मीठा नीम, पुश्करमूल, मुनक्का, असगंध (अश्वगंधा),  मुलेठी, (50 ग्राम) प्रत्येक।

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  1. मुख्य द्रव्य
  • ताज़ा आंवले = 6.5 kg
  1. यमक सामग्री
  • टिल का तेल = 250 ग्राम
  • घी = 250 ग्राम
  1. संवाहक सामग्री
  • चीनी = 3 किलो
  1. प्रेक्षप सामग्री
  • दल चीनी = 50 ग्राम
  • नागकेशर = 20 ग्राम
  •  केसर = 2 ग्राम
  • पिप्पली = 100 ग्राम
  • तेजपत्र = 20 ग्राम
  • छोटी इलायची = 20 ग्राम
  • शहद = 250 ग्राम
  • बंशलोचन = 150 ग्राम
  1. क्वाथ द्रव्य
  • प्रत्येक द्रव्य 48 ग्राम लें

ये है च्यवनप्राश को बनाने की विधि (Method Of Making Chyavanprash):

अब हम आपको बताने जा रहे है की आप कैसे घर बैठे च्यवनप्राश को बना सकते है।

तो चलिए आइए जानते है की आप कैसे घर च्यवनप्राश बना सकते है :

  • सबसे पहले आपको जड़ी-बूटियों को जौकूट पाउडर को एक किलो पानी में 24 घंटे पहले भिगो देना चाहिए।

 

  • फिर आपको एक किलो ताज़े हरे आवंलो को एक लीटर पानी में डालकर उसको फिर प्रेशर कूकर में उबलने के लिए रख देना है। जब  कूकर की तीन सीटियाँ आ जाएं तो उसको उतर दें और 15 मिनट तक उसको ठंडा होने के लिए रख दें।

 

  • उसके बाद में आप उबले हुए आवंलो की गुठली को निकल दें और फिर उनक अलग करने के पश्चात् गूदे को स्टील की चलनी या फिर कद्दूकस को चिकने वाले हिस्से की ओर या फिर सूती कपडे या फिर आटे को छानने कर छलनी में उसको घिस लें, जिससे की उसके अनावश्यक रेशें अलग हो जाए और इसका मुख्य  उद्देश्य यह है की पल्प यानि की गूदे से रेशो को अलग करना।

 

  • अगर उसके रेशें अलग न हो सकें तो उनको गुठली निकले हुए आंवले के गूदे को मिक्सी में उसको डालकर पेस्ट बना लें और फिर ही आगे बढें।

 

  • आब आप इस पोस्ट को ऊपर बताए हुए अनुपात के हिसाब से देशी घी में बिलकुल मंद आंच पर तब तक तलते रहे जब तक की आँवले की पिट्ठी यानि की घी लगभग पूरी तरह से ना छोड़ दें। इस तरह से तैयार की हुई पिट्ठी को आप कई महीनो तक स्टील के शीशो या फिर स्टील के बर्तनों में सुरक्षित रखें और फिर उसको आवश्यकतानुसार प्रयुक्त  करें।

 

  • आंवले के उबलने के पश्चात् आप उसको निचे बाद में बर्तन में जो पानी शेष बचा रहता है, उसको आपको सुरक्षित रख लेना चाहिए और इसी पानी में आपको च्यवनप्राश की जड़ी-बूटियों के जौकुट पाउडर को, जो की आपने 24 घंटे पहले आपने एक लीटर पानी में उसको भिगोया था फिर उसको मलकर आप मंद आंच पर करीब दो घंटो के लिए उबलने के लिए रख दें। एक  बात का खास ध्यान रखें की जितनी धीमी आप आंच को लों रखेंगे उतना ही बढ़िया आपका क्वाथ च्यवनप्राश बनेगा।

 

  • फिर क्वाथ को ठंडा होने के बाद उसको छान लें और फिर इसके पानी को आप लगभग 10 से 12 घंटो के लिए एक ही जगह पर उसको स्थिर रूप से रखा रहने दें जिससे की वो कीट यानि की गंदला पदार्थ नीचे बैठ जाएगा। बाद में आप छने हुए पानी के साथ कीट के चले जाने पर बनने वाले च्यवनप्राश में बहुत ज्यादा कड़वाहट आ जाती है।

 

  • फिर आपको इस बने हुए पदार्थ को सावधानीपूर्वक किसी दुसरे बर्तन में उड़ेल लें जिससे की उसमे से कीट बिलकुल अलग हो जाए और जल अलग हो जाए।

 

  • फिर आपको बाद में अलग किये हुए औषधीय जल में करीब 1500 ग्राम यानि की डेढ़ किलो शक्कर को डालकर उसको थोड़े देर उबलने के लिए रख देना है। इसी बीच आपको गरम किए हुए दूध के हल्के-हल्के छींटे मारते रहें जिससे की उसका मैल ऊपर आ जाए। आपको पिट्ठी को प्रारम्भ से ही बिलकुल ही ढककर रखना है। फिर आपको उसको चाशनी में दल देना है और उस बर्तन को धीरे-धीरे चूल्हे से उतारकर उसको पिट्ठी को चाशनी में खूब घोटना है या फिर पिट्ठी को किसी अलग बर्तन में लेकर उसको तीन तार वाली चाशनी में डालकर उसका पेस्ट सा बना लेना है। फिर आपको उस पेस्ट को एक चाशनी में डालकर उसको एक रस कर लें। यह बात बिलकुल ध्यान देने योग्य है की उसको ज्यादा अधिक देर तक भुनी हुई पिट्ठी रखी ना रहने दें क्यूंकि ऐसा करने से उसकी उपरी सतह पर काले-काले रंग की कड़ी पपड़ी सी जैम जाती है। आपको उसको फेकना नही चाहिए बल्कि आपको उसकी बजाय उसे एक अलग कर लें और मसल कर एक पिट्ठी के समान जैसा चिकना बनाकर पिट्ठी में ही उसको मिला लेना चाहिए।

 

  • जब वो उक्त चाशनीयुक्त पिट्ठी एकरस हो जाती है तो तब आपको कुनकुनी यानि की हल्के-हल्के गर्म पानी ही क्रमांक 6 से 12 तक का पाउडर भी आपको थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ही उसको डालकर उसकी घुटाई करते रहे।

 

  • जब वो लगभग ठंडा हो जाए तब आपको उसके शहद में मिलकर उसको पूरी तरह से मिला लेना है।

 

  • आपको उसको करीब न करीब 24 घंटे तक ठंडा होने के लिए छोड़ देना है। अब आपके पास 1 किलो आँवले से लगभग  ढाई किलो च्यवनप्राश तैयार है।

 

  • अगर आपको ज्यादा आँवले का च्यवनप्राश बनाना है तो उसके लिए आपको जैसे तीन किलो आँवले का बनाना है तो उसके लिए आपको सामग्री भी 3 गुना कर देनी है लेकिन इसमें चाशनी तीन तार की ही रहनी चाहिए।

 

  • अगर आपको च्यवनप्राश को ज्यादा गाढ़ा या फिर ज्यादा पतला यानि की ज्यादा नरम करना है तो इसके लिए आपको चाशनी को क्रमशः थोड़ी सी गाढ़ी या फिर पहली कर देना है। अगर आपका कड़ा ज्यादा सख्त हो गया है तो आप 20 चम्मच यानि की 100 मि.ली पानी में 3 चम्मच घी को मिलकर उबालना है। जब भी पानी खौलने लगे तो गाढ़ा च्यवनप्राश को उसमे डाल लें। उसको एकरस होते ही आप उसको उतर कर ठंडा कर लें।

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च्यवनप्राश को खाने के फ़ायदे (Benefits Of Eating Chyavanprash)

च्यवनप्राश दुनिया के लिए आयुर्वेद द्वारा दिया गया एक बहुत ही अनोखा और अनमोल तोहफा है और आपको बात दें की प्राचीन काल से ही च्यवनप्राश को आयुर्वेद की एक अति महत्वपूर्ण रसायन औषधियों मे से एक मन गया है।

आपको बता दें की च्यवनप्राश आज के समय भी सबसे ज्यादा बिकने वाले स्वास्थ टोनिकों में से एक है।

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मानसिक शक्तिवर्धक है च्यवनप्राश:

आपको बता दें की च्यवनप्राश आपकीएकाग्रता और याददाश्त को बढ़ाने में बहुत सहायक है। च्यवनप्राश का सेवन करने से आपके तनाव का स्तर भी काफी हद तक कम होता है, आपको नींद भी काफी अच्छी आती है और इससे आपकी मेमोरी भी काफी तेज़ हो जाती है।

च्यवनप्राश बढाता है आपकी इम्युनिटी

आपको बता दें कीच्यवनप्राश का मुख्य घटक है आंवला जो की आपकी इम्युनिटी को बूस्ट कर देता है और आपकी उम्र के प्रभाव को भी काफी कम कर देता है और यह उन महिलाओं के लिए बहुत अच्छा रहता है जो की हमेशा अपनी उम्र को कम दिखाती है।

यह आपकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति को भी बढ़ाता है और च्यवनप्राश विटामिन-सी का प्रमुख स्त्रोत है।

इस प्रकार से इसमें बहुत सी अन्य टाइप की जड़ी बूटियां भी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढाती है। च्यवनप्राश का सेवन करने से आपकी त्वचा पर भी चमक आती है और आपके चेहरे पर झुर्रियां कम हो जाती हैं।

आपच्यवनप्राश का सेवन किसी भी मौसम में कर सकते है लेकिन ज़्यादातर लोग इसका सेवन सर्दियों के समय करते है।

च्यवनप्राश आपकी पाचन शक्ति को बढाता है

च्यवनप्राश भूख को भी खूब बढाता है और साथ ही साथ यह आपकी पाचन शक्ति को भी खूब मजबूत करता है। आपको बता दें की च्यवनप्राश गैस और कब्ज़ के लिए भी नाशक होता है जिससे की खाया पिया सही से हज़म हो जाता है।

सर्दियों मेंच्यवनप्राश को खाने से आपके शरीर में गर्माहट पैदा होती है और साथ ही साथ आप मौसमी बिमारियों से भी बचे रहते है।

श्वसन संस्थान के लिए है अति उपयोगी

आपको बता दें कीच्यवनप्राश श्वसन संस्थान के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है और यह नजला, खासी और जुखाम से भी आपका बचाव करता है। च्यवनप्राश खासी और लर्जीजन्य जुकाम के लिए भी बहुत उपयोगी होता है।

च्यवनप्राश महिलाओं की माहवारी को भी नियमित रखता है और साथ ही साथ यह आपकी खून की कमी को भी दूर करता है, आपकी थकान को मिटाता है और आपकी शरीर में कैल्शियम की कमी को भी पूरा करता है।

च्यवनप्राश आपके शरीर में खून की कमी को भी दूर रखता है और आपके शरीर में हीमोग्लोबिन कि मात्रा को भी बढाता है, आपके शरीर की थकान को दूर भगा कर यह आपके शरीर में चुस्ती और फुर्ती लता है।

च्यवनप्राश बच्चो के शरीर में बार बार होने वाली सर्दी और जुखाम में भी बहुत फायदेमंद साबित होता है और इसका स्वाद भी रुचिकर होता है जिससे की बच्चो, पुरुषो और स्त्री सभी जन बड़े ही चाव से खाते है।

अगर आपकोडायबिटीज है तो ऐसे में आपको चिकित्सक की सलाह से या फिर आपको शुगर फ्री च्यवनप्राश का ही सेवन करना चाहिए।

सूखे च्यवनप्राश को कैसे बनाए (How To Make Dried Chyavanprash)

  • सबसे पहले आपको जड़ी-बूटियों का क्वाथ और शक्कर लेनी है और उसकी उबालना है और उसको तब तक उबालना है जब तक की चार तार की चाशनी ना बन जाए। फिर आपको कढ़ाई लेनी है और उको पूरी तरह से ठंडी करने के लिए रखना है और उसको ऐसा एक दिन तक रहने देना है। उसके बाद में आपको चाशनीके ठन्डे होने पर उसका बुरा बना लेना है या फिर आप उसका  एक साथ बूरा भी बना सकते है। जब वो बूरे की स्थिति में आ जाए तब आप पिट्ठी एवं पिसा हुआ पाउडर उस पर डाल दें और फिर उसको बिलकुल अच्छी तरह से मिलकर उसको आची तरह से उसका बूरा बना लें और ध्यान रहें की इसमें शहद नही डाला जाता है।

 

  • इस तरह से तैयार हुए दोनों ही प्रकार के च्यवनप्राश में से किसी भी एक का आप सुबह और शाम को एक-एक चम्मच दुश के साथ सेवन करते रहना चाहिए और ऐसा करने से हर्र एक व्यक्ति स्वस्थ बना रहेगा। आपके शरीर में विटामिन-सी की अधिकता के कारण आपके जीवन-शक्ति स्फूर्ति व प्रसन्नता समय अनुसार बढती रहती है और वृद्धावस्था में भी नौजवानों जैसी स्फूर्ति, सक्रियता एवं मस्ती आपके शरीर में बनी रहती है।आपको बता दें की आयर्वेद के शास्त्रों में इसे भूख को बढ़ने वाला, पित्त रोगनाशक, बुद्धि व स्मरण-शक्तिवर्धक प्रसन्नता, खाँसी-श्वाँस वात, शुक्र एवं मु़ दोष हरने वाला और वर्ण एवं कान्तिवर्द्धक बताया गया है।

 

  • आपको बता दें की च्यवनप्राश एक बहुत ही उत्तम आयुर्वेदिक औषध एवं पौष्टिक खाद्य है, जिसका एक प्रमुख घटक है और वो है आँवला। आपको बता दें की यह एक जठराग्निवर्धक और बलवर्धक है और इसका सेवन हर एक इंसान को जरुर से भी जरुर करना चाहिए।

 

  • किसी-किसी की धारणा यह भी है की लोगो को च्यवनप्राश का सेवन केवल और केवल शीत ऋतु में ही करना चाहिए परन्तु इसको सर्वथा भ्रांत मान्यता है और आपको बता दें की इसका सेवन सब तरह की ऋतुओं में किया जा सकता है। आपको बता दें की ग्रीष्म ऋतु में यह बिलकुल भी गर्मी नही करता है क्यूंकि इसका प्रधान द्रव्य आँवला है जो की शीतवीर्य होने से पित्तशामक है। आपको आँवले को उबालकर उसमे 56 प्रकार की वस्तुओं के अतिरिक्त हिमालय से लायी गई वज्रबला (सप्तधातुवर्धनी वनस्पति) भी डालकर इस च्यवनप्राश को बनाया जाता है।

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आपको च्यवनप्राश को कितनी मात्रा में लेना चाहिए (How Much Should You Take Chyavanprash)

  • आप च्यवनप्राश को नाश्ते के साथ 15 से 20 ग्राम सुबह और शाम लेना है। बच्चो को इसे 5 से 10 ग्राम लेना चाहिए। आपको बता दें की च्यवनप्राश का सेवन करने से 2 घंटे पूर्व तथा 2 घंटे बाद तक आपको बिलकुल भी दूध का सेवन नही करना चाहिए।

 

  • आपको बता दें की च्यवनप्राश को केवल बीमारी की दवा के रूप में ही नही लिया जाता बल्कि इसे तो मनुष्य के लिए उत्तम खाद्य मन गया है। क्या आपको पता है की आँवले में वीर्य की परिपक्वता कार्तिक पूर्णिमा के बाद ही आती है लेकिन जानने में केवल यही आता है की कुछ बाजारू औषध निर्माणशालाएँ (फार्मेसियाँ) केवल धन कमाने के लिए व च्यवनप्राश की मांग को पूरा करने के लिए हरे आँवलो की अनुपलब्धता में आँवला चूर्ण से ही च्यवनप्राश बनाती हैं और कहीं न कहीं तो इसके स्वाद के लिए भी इसमें शकरकंद का भी प्रयोग किया जाता है।

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  • ना जाने ये कैसी बिडंबना है की केवल धन को कमाने के लिए कुछ तूच और स्वार्थी लोग द्वारा कैसे-कैसे अलग-अलग तरीके अपनाए जाते है! करोडो रुपये कमाने की धुन में लोग लाखो-लाखो रुपए केवल प्रचार में ही लगाने वाले लोगो को इस बात का नही पता चलता की लोहे की कुल्हाड़ी में च्यवनप्राश नही बनाया जाता है। उन लोगो को तो यह भी नही पता की ताज़े आँवलों से और कार्तिक पूनम के बाद ही वीर्यवान च्यवनप्राश को बनाया जाता है।

 

  • आपको बता दें की जो लोग कार्तिक पूनम से पहले ही च्यवनप्राश को बनाकर बेचते है और लाखो रुपए को विज्ञापनो में खर्च कर देते है, वो लोग केवल और केवल अपने करोडो रुपयों के सपने को साकार करने में लगे रहते है। आपको बता दें की ऐसे लोगो का लक्ष्य केवल और केवल पैसा कमाना ही होता है और इनका मानव स्वास्थ के साथ किसी प्रकार का कोई संबंध नही होता है।
Amit Shrivastava
 

हैल्लो, मेरा नाम अमित अम्बरीष श्रीवास्तव है। मैं एक लेखक और एक ब्लॉगर हॅू और मुझे रचनात्मक लेखक बहुत पसंद है। मैंने 2013 में अपनी ब्लॉगिंग करियर की शुरूआत की थी, और कभी पीछे नहीं देखा। य​ह ब्लाग मैने स्वास्थ्य और तंदुस्र्स्ती से सम्बन्धित अपने विचार साझा करने के लिये बनाया है और मुझे आशा है कि आपको इसका कॉंटेंट पसंद आयेगा।

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