बवासीर के लक्षण,कारण और सबसे बेहतरीन ईलाज -Home Remedies For Piles

दोस्तों ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें कोई व्यक्ति किसी दूसरे आदमी से बताने में झिजक मानता है क्योंकि उसे लगता है के अगर उसने किसी को बता दी तो शायद उसका मजाक उडाया जाए। लेकिन अगर आप किसी को बताओगे नहीं तो आपको हो सकता है के सही इलाज ना मिले।लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम आपको आज पाइल्स या बवासीर से जुड़े कुछ ऐसे घरेलू और दुसरे ईलाज भी बताने वाले हैं जिनको पढने के बाद आपको किसी के आगे बताने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

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आपने बहुत बार टीवी या अख़बार में विज्ञापन देखे होंगे के बवासीर को करें 1 टीके में जड़ से खत्म, और भी बहुत सारी बातें, लेकिन जिन लोगों को इसके बारे में नहीं पता के ये हैं क्या आपको बता दें के जब शरीर के निचले हिस्से यानी गूदे या फिर मल द्वार की नसों में सूजन आ जाती हैं और इसके कारण गूदा के भीतरी हिस्से और बाहरी हिस्से में कुछ मस्से जैसे बन जाते हैं जिनमे से खून निकलता है और पीड़ित व्यक्ति को इससे असहनीय दर्द भी होता है।पाइल्स (बवासीर) की समस्या अगर परिवार में किसी को ऐसी समस्या रही है तो आगे की आने वाली पीढ़ियों को इसके होने की आशंका बन जाती है।

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बवासीर होने का कारण क्या है?

दरअसल दोस्तों बवासीर होने का सबसे मुख्य कारण कब्ज को माना जाता है।बच्चों को कब्ज की समस्या ज्यादा होती है तो आगे जाकर इसके कारण उनको पाइल्स की समस्या हो सकती है।कब्ज के कारण मॉल त्यागने के समय काफी जोर लगाना पड़ता है और बहुत देर तक एक ही अवस्था में बैठना पड़ता है इसी कारण गुदा पे दबाव पड़ता है और यही कारण है बनता है बवासीर होने का। बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें बहुत ज्यादा देर तक खड़ा रहना पड़ता है जिसकी वजह से भी उन्हें पाइल्स की समस्या हो सकती है।इसके अलावा अप्राकर्तिक सम्बन्ध बनाने के कारण भी बवासीर हो सकती है।मोटापे को भी बवासीर की एक बड़ी वजह बताया गया है।बहुत बार प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के समय बवासीर की समस्या हो जाती है। इन सबके अलावा कम फाइबर युक्त खाना, भारी काम करने के कारण गुदे पर दबाव, किसी प्रकार के खाने से एलर्जी, शारीरिक परिश्रम की कमी,और तले हुए भोजन को ज्यादा खाना।

bawaseer piles ke karan

बवासीर होने के लक्षण:

दरअसल जब हम मॉल त्यागते हैं तो इसके साथ खून आना बवासीर होने का एक प्रमुख लक्षण है। गुदा के आस पास सुजन या फिर किसी भी प्रकार की गाँठ होना।गुदा के पास की जगह में खुजली होना। मल जत्यागने के बाद भी ऐसा रहना जैसे के पेट अच्छे से साफ़ न हुआ हो। अक्षर होता है के पाइल्स में मरीज को दर्द नहीं होता है लेकिन कभी कभी उसे दर्द होता है जब उसने इन्फेक्शन होना शुरू हो जाता है, आपको तुरंत अपना इलाज करना चाहिए।

bawaseer ke ghreu ilaj

किसी को बवासीर होना एक बेहद ही आम बात है लेकिन अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाये तो इसके कारण आपके शरीर में रक्त की कमी, गुदा की उतकों की हानि, और यहाँ तक गुदा कैंसर तक हो जाता है इसीलिए समय रहते इसका ईलाज जरुरी है।

बवासीर के स्टेज:

ग्रेड: ग्रेड 3 की बिगड़ी हुई स्थिति होती है। इसमें मस्से बाहर की ओर लटके रहते हैं। जबर्दस्त दर्द और खून आने की शिकायत मरीज को होती है। इंफेक्शन के चांस बने रहते हैं।

शुरुवाती स्टेज: इस स्टेज में मरीज को कुछ खास पता नहीं चलता और न इसके लक्षण दिखाई देते हैं।इसमें मरीज को बस गुदा जगह पर खुजली सी होती है और मॉल त्यागने के समय ज्यादा जोर लगाने र कभी खून भी आ सकता है। कई बार तो मरीज को इस स्टेज में पता भी  लगता के उसे बवासीर की शिकायत है।इस स्टेज में मरीज को पाइल्स अन्दर की तरफ होते हैं, और मरीज को दर्द भी नहीं होता।

दूसरी स्टेज: इस स्टेज में मरीज को हुए मस्से बाहर आने शुरू हो जाते हैं,और इस स्टेज में आकर मरीज को पता चलता है के उसे बवासीर की शिकायत है।इस स्टेज में मरीज को पहले से ज्यादा दर्द होने लग जाता है और खून भी पहले की तुलना में थोडा ज्यादा आने लग जाता है।

तीसरी स्टेज: यहाँ से मरीज की हालत खराब होनी शुरू हो जाती है और मरीज को हुए मस्से कुछ ज्यादा बाहर जाते हैं। इस स्टेज इन मरीज को दर्द ज्यादा होने लग जाता है और खून भी पहले से ज्यादा आने लग जाता है।

चौथी स्टेज: इस स्तिथि मिओं मरीज को इन्फेक्शन होने के सबसे ज्यादा चांस होते हैं। मरीज को लगातार खून आने की शिकायत होती है और दर्द भी बहुत ज्यादा होने लग जाता है इस स्थिति में मरीज को इलाज की सख्त जरूरत होती है नहीं तो मरीज को कैंसर तक भी हो सकती है।

बवासीर के कुछ बेहतरीन घरेलू ईलाज:

एलोवीरा करता है बवासीर को जड़ से खत्म(aloevera se bawaseer ka ghrelu ilaj)

एलोवेरा बवासीर के कारण हुई जलन को कम करने के चमत्कारिक गुण अपने अन्दर रखता है, और ये गुदा के आस पास हुई सुजन और खुजली को भी कम करता है।एलोवेरा को सीधे सीधे तौर पर लगाने से ही ये काफी हद तक ठीक करने में सक्षम होता है। एलोवेरा से इलाज करने के लिए एक ताजा पत्ती लें और इसके सारे काटों को निकलर इसे करीब 1-2 घंटे तक फ्रीज में रख दें। दरअसल फ्रीज में रखने का कारण ये है के एलोवेरा ठंडा होने पर और भी ज्यादा फीफा देता है। इसके बाद इसे निकालकर गुदा के स्थान पर 3-4 घंटे तक लगा लें। इसका और अधिक फायदा लेने के लिए आप एलोवेरा के पत्ते की छीलकर इसका गुदा भी निकालकर लगा सकते हैं।

aleo vera se piles ka ilaj

बर्फ से बवासीर को जड़ से खत्म (ice se bawaseer ka upchar)

बवासीर में बर्फ काफी राहत देने का काम करती है, और बहुर बार देखा गया है के बर्फ से बवासीर जड़ से खत्म हुई है। बर्फ से अंदरूनी सुजन, खुजली, और दर्द से राहत दिलाने का काम करती है।इसके लिए आपको गुदा के पास बर्फ को एक थैली या फिर पैक्ड बर्फ को एक कपडे में लपेट लें और इसे करीब 10 से 15 मिनट तक रखें।दिन में 3-4 बार इसका उपियोग करना आपके लिए सही होगा।

सेब के सिरका से बवासीर का ईलाज(bawaseer ka upchar seb ke sirke se)

सेब के सिरके का उपियोग सुजन को कम करने, सूजी हुई रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने में मदद करता है और इसके अलावा ये जलन में भी राहत दिलाता है।

सेब के सिरके से बाहरी बवासीर का इलाज करने के लिए थोडा सा सिरका लेकर उसे एक रुई की मदद से गुदा के पास धीरे धीरे लगाएँ।जब आप शुरू में इसे लगाएँगे तो आपको थोड़ी जलन हो सकती है लेकिन बाद में आपको ये खुजली और जलन से काफी हद तक राहत देगा।अंदरूनी बवासीर के लिए, एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर इसे दिन में कम से कम दो बार पियें।

मोटापा घटाने में भी कारगर है सेब का सिरका ।

बादाम के तेल से बवासीर का घरेलू ईलाज (Badaam tel se piles ka ilaj)

दरअसल आयुर्वेद में बादाम के तेल को उसके प्रशामक एवं कोशिकाओं को एक गहरा रूप से सोखने के गुणों के कारण जाना जाता है। बादाम के तेल का उपियोग मुख्य प्रकार से बाहरी बवासीर के ईलाज के लिए किया जाता है।

badaam ke tel se bawseer ka ilaj

बादाम से ईलाज करने के लिए आपको शुद्ध और ताजा बादाम का तेल लेकर उसे एक रुई के टुकड़े में डुबो कर इसको गुदा के बाहरी हिस्से में लगा लें।ये तेल सूजन और जलन को नमी देता है, जिसके कारण आपको गुदा द्वार के आसपास जलन और खुजली कम होने लगती अहि और धीरे धीरे आप ठीक हो जाते हैं। इसको आप दिन में कई बार करें।

नारियल की जटाओं से खुनी बवासीर का रामबाण इलाज (khooni bawaseer ka ilaj)

दोस्तों पुराणी और खुनी बवासीर का ईलाज काफी मुश्किल होता है लेकिन इतना भी नहीं आप नारियल की जटाओं से खुनी बवासीर को जड़ से खत्म कर सकते हैं। इसके लिए आपको थोड़ी सी नारियल की जताएं लेकर उन्हें जलाकर उनकी भसम बना लें और उसे गुदा के आस पास लगा लें या फिर आप इस भसम को हर रोज सुबह खली पेट पी भी सकते हैं। ये ईलाज खुनी बवासीर का सबसे बढ़िया और कारगर बताया गया है।

अंजीर से बवासीर का घरेलू ईलाज (Anjeer se bavaseer ka ghrelu ilaaj)

रात को सोने से पहले 4 अंजीर लेकर इसे पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इस पानी को पी लें, इसके पीने के बाद आधे घटने तक कुछ नै खाएँ।आपके बवासीर के मस्सों की शिकायत थोड़े दिन में खत्म हो जाएगी।दरअसल अंजीर बवासीर के मस्सों(bawaseer ke masse) में ही नहीं बल्कि हमारे शरीर के बहुत सारे हिस्सों में लाभ करती है।

जीरे से बवासीर के घरेलू ईलाज (jeera se bawaseer ka ghrelu ilaj)

दोस्तों अगर आपको बवासीर है और आपको खुजली और जलन काफी हो रही है तो आप जीरे को पीसकर इसका लेप बनाकर इसे गुदा के आसपास लगाएँ। ये लगाने से आपको जलन और बवासीर के मस्सों से होने वाले दर्द में राहत मिलेगी। जीरा आपको खुनी बवासीर से भी राहत दिलाने का करता है।

नींबू के रस से बवासीर का ईलाज (nimbu ke ras se bawaseer ka gharelu ilaj)

दरअसल नीम्बू के रस में बहुत सारे ऐसे एंटी ओक्सिडेंट होते हैं जो बवासीर की की समस्या से लड़ने में आपकी मदद करते हैं।निम्बू का प्रयोग सीधे तौर पर गुदा पर लगाने से भी राहत मिलती है।निम्बू के रस में आप थोडा सा अदरक और शहद मिला लें और इसका सेवन करें,इसके सेवन से आपको बवासीर में होने वाली जलन को बहुत ही कम कर देता है।

जैतून के तेल से बवासीर का ईलाज (jaitun ke tel se bawaseer ka ilaj) 

दोस्तों जैतून का तेल बाहरी बवासीर के लिए काफी उपियुक्त होता है क्योंकि इसमें बहुत सारे  एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो हमारी रक्त वाहिकाओं की लोच को बढ़ाने का काम करता है। रक्त वाहिकाओं की लोच बढ़ने के कारण गुदा द्वार के आस पास की सूजन कम हो जाती है और इसके साथ जैतून का तेल गुदा का पास होने वाली खुजली को भी कम करता है।

jaitoon ka tel

गर्म पानी में सेक लगाने से मिलेगी राहत (Bawaseer ka ilaj garm paani mein sek)

दरअसल बवासीर के इलाज का ये एक सबसे अच्छा तरीका है और इससे मरीज को काफी राहत भी मिलती है। इसके लिए आपको 1 बाल्टी पानी गर्म करके इसमें प्रभावित भाग को कम से कम 20 मिनट तक डुबोना होगा।ऐसा करने के आपकी रक्त धमनियों को काफी सुकून मिलता है और आपको खुजली और जलन से काफी राहत मिलती है। ऐसा आप दिन में 2 बार भी कर सकते हैं।आपको जल्दी ही इसके परिणाम मिलने लग जाएँगे।

ज्यादा मात्रा में पानी पिएँ (Drink more water)

बवासीर के रोगी को दिन में कम से कम 7 से 8 गिलास पानी पीना चाहिए क्योंकि जब हम ज्यादा मात्रा म्विन पानी पीते हैं तो हमारे शरीर से पानी अशुद्धियों को निकालता है।पानी पीने से आपकी आँतों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहता है जिससे मल भी नमी युक्त रहता है और इसके कारण आपको कब्ज की समस्या भी नहीं होती।

तो दोस्तों ये थे बवासीर के कुइच घरेलू ईलाज जो आपको शुरुवाती चरण में बवासीर से निजात दिला देते हैं लेकिन इसके बाद अगर स्थिति बिगड़ जाए तो आप इस तरीके से अपना ईलाज करवा सकते हैं:

इसमें आप तीन तरह के ईलाज अपना सकते हैं:

  1. ऐलोपैथी के द्वारा बवासीर का ईलाज
  2. होम्योपैथी के द्वारा बवासीर का ईलाज
  3. आयुर्वेद के द्वारा बवासीर का ईलाज

ऐलोपैथी के द्वारा बवासीर का ईलाज :

  • दवाओं के जरिये:

अगर आप बवासीर की पहली या दूसरी स्टेज में हैं तो ये आसानी से दवाओं के जरिये ठीक हो सकती है।इसमें आपको                 ऑपरेशन करवाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती।इसके लिए आपको डॉक्टर की सलाह पर ही दवाई लेनी चाहिए।

  • ऑपरेशन रबर बैंड लीगेशन (Rubber Band Ligation) अगर मस्से थोड़े बड़े हैं तो रबर बैंड लीगेशन का प्रयोग किया जाता है। इसमें मस्सों की जड़ पर एक या दो रबर बैंड को बांध दिया जाता है, जिससे उनमें ब्लड का प्रवाह रुक जाता है। इसमें डॉक्टर एनस के भीतर एक डिवाइस डालते हैं और उसकी मदद से रबर बैंड को मस्सों की जड़ में बांध दिया जाता है। इसके बाद एक हफ्ते के समय में ये पाइल्स के मस्से सूखकर खत्म हो जाते हैं। एनैस्थिसिया देने की जरूरत नहीं होती। एक बार में दो-तीन मस्सों को ही ठीक किया जाता है। इसके बाद मरीज को दोबारा बुलाया जाता है। इसमें भी अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। इस प्रॉसेस को करने के 24 से 48 घंटे के भीतर मरीज को दर्द महसूस हो सकता है, जिसके लिए डॉक्टर दवाएं दे देते हैं।
  • रबर बैंड लीगेशन के जरिए: अगर बवासीर के मस्से बाहर की तरफ निकलकर थोड़े बड़े हो गए हैं तो डॉक्टर इसमें  रबर बैंड लीगेशन का प्रयोग करते हैं। जिसमें मस्सों को एक रबर बैंड के जरिये बाँध दिया जाता है और ये रबर बंद रक्त के प्रवाह को रोक देते हैं जिसके कारण मस्से थोड़े दिन में सुखकर अपने आप गिर जाते हैं। इस प्रक्रिया में मरीज  को 24 से 48 घंटे में थोडा बहुत दर्द हो सकता है, जिसके लिए डॉक्टर दवाएं दे देते हैं।
  • स्टेपलर सर्जरी (Stapler surgery) ये प्रक्रिया सबसे आखरी स्टेज के बवासीर के लिए अपनाई जाती है जिसमें मरीज को एक हफ्ते के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है।इस प्रक्रिया में पाइल्स को एक सर्जिकल स्टेपल के द्वारा वापिस अन्दर की तरफ भेज दिया जाता है जिसमें ब्लड की सप्लाई को भी रोका जाता है और थोड़े दिन में मस्से सुखकर ठीक हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में मरीज को दर्द भी कम होता है।

 

होम्योपैथी से बवासीर का ईलाज: ऐलोपैथी दवाएँ लेने के बाद कई बार देखा गया है के मरीज को बवासीर की समस्या दोबारा हो जाती है इससे बचने के लिए मरीज को होम्योपैथी की दवाएँ लेनी चाहिए। दरअसल होम्योपैथी दवाओं के इलाज में समय तो जरुर लगता है लेकिन ये बवासीर को जड़ से खत्म करने में कारगर शाबित होती हैं। इनके द्वारा ईलाज करने में कम से कम 1 से 2 महीने का समय लग जाता है।होम्योपैथीक दवाएँ स्टेज 1 और स्टेज 2 के बवासीर के लिए काफी कारगर शाबित होती हैं।

आयुर्वेद के द्वारा बवासीर का ईलाज:

आयुर्वेद के जरिये  बवासीर का ईलाज करने का एक सबसे प्रचलित तरीका है क्षारसूत्र के द्वारा। इससे इलाज करने के लिए डॉक्टर एक धागे का उपियोग करते हैं जिसे बहुत सारी देसी दवाई का उपियोग करके बनाया जाता है।

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इसमें ईलाज के दोरान शुरुवात में मरीज को लोकल एनैस्थिसिया दिया जाता है। इस ईलाज में मरीज कोअस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। ये प्रक्रिया शुरू करने से पहले डॉक्टर एक औजार की सहायता से पाइल्स को देखते हैं और उसके बाद इस क्षारसूत्र धागे से मस्सों से बांध देते हैं। दरअसल मस्सों की जड़ में एक ऐसी जगह होती है जहां दर्द नहीं होता। ठीक इसी जगह पर इस धागे को बांध दिया जाता है। और ये दवाई युक्त होने के कारण मस्सों को सुखा देते हैं और थोड़े दिन में मास ठीक हो जाते हैं। ऐसा कहा गया है के क्षारसूत्र से इलाज के बाद मरीज को दोबारा बवासीर की शिकायत नहीं होती।

दोस्तों बहुत सारी रिसर्च करने के बाद हमें एक ऐसा अस्पताल मिल गया जिसमें क्षारसूत्र के जरिये इलाज किया जाता है। ये अस्पताल है दिल्ली में स्थित तिबिया अस्पताल जो दिल्ली के करोल बाग़ इलाके में है और ये अस्पताल सरकारी होने के कारण फ्री ईलाज भी मिल जाता है आपको।

 

 

 

 

Amit Shrivastava
 

हैल्लो, मेरा नाम अमित अम्बरीष श्रीवास्तव है। मैं एक लेखक और एक ब्लॉगर हॅू और मुझे रचनात्मक लेखक बहुत पसंद है। मैंने 2013 में अपनी ब्लॉगिंग करियर की शुरूआत की थी, और कभी पीछे नहीं देखा। य​ह ब्लाग मैने स्वास्थ्य और तंदुस्र्स्ती से सम्बन्धित अपने विचार साझा करने के लिये बनाया है और मुझे आशा है कि आपको इसका कॉंटेंट पसंद आयेगा।

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